मंगलवार, 1 अगस्त 2023

सुधा मूर्ति - विद्वत्ता व विनम्रता का दुर्लभ संयोग

 


अपनी बचत के दस हजार रुपए को करोड़ो मे परिवर्तित करने वाली सुधा मूर्ति शिक्षित वर्ग से लेकर गृहणी तक के लिए प्रेरणा का स्रोत है | आभासी पटल पर उनके जीवन से जुड़ी बाते बहुत चर्चा मे रहती है उनका सौम्य सरल व्यक्तित्व जन - सामान्य को आश्चर्य मे डालता है कि वह शिक्षित ,सफल व धनवान होने के साथ इतनी विनम्र , हंसमुख व सनातन संस्कृति से जुड़ी हुई कैसे है ? 

सुधा मूर्ति लेखिका होने के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता भी है | राष्ट्रपति द्रोपदी  मुर्मू द्वारा पद्म विभूषण से सम्मानित सुधा मूर्ति को 2006 मे पद्म श्री पुरस्कार प्राप्त हो चुका है | 

ढेरो उपलब्द्धियो की धनी सुधा जी ने अपने पति के साथ मिलकर दस हज़ार रूपए से  इंफ़ोसिस की स्थापना 2 जुलाई 1981 में की |    

B.V. Bhoomaraddi college of Engineering & Technology मे पहली महिला छात्रा होने के कारण  सुधा जी को बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा |कॉलेज के अंदर महिलाओ के लिए वाशरूम नहीं था | प्राचार्य द्वारा तीन नियम बताए गए कि उन्हे केवल साड़ी पहननी होगी दूसरा यह की वह कैन्टीन नहीं जाएगी और तीसरा यह कि वह लड़कों से बात नहीं करेगी | सुधा जी ने सभी नियमों का पालन किया | पहले ही वर्ष मे सुधा जी ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की तो छात्र स्वयं आकर उनसे बात करने लगे |

टाटा मोटर्स लिमिटेडजिसे पहले टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी ( टेल्को ) के नाम से जाना जाता था, 1974 मे सुधा जी ने टेल्को कंपनी का विज्ञापन देखा कि  यह नौकरी केवल पुरूषों के लिए है | यह  बात सुधा जी को उचित नहीं लगी और उन्होंने पोस्टकार्ड मे लिंगभेद के विरोध मे आपत्ति लिखकर सीधे जे आर डी टाटा को भेज दिया इस आपत्ति पत्र के बाद कंपनी के नियम मे बदलाव हुआ | बाद मे सुधा मूर्ति टेल्को कंपनी की प्रथम महिला इंजीनियर बनी |   इससे यह प्रेरणा मिलती है कि -

" अपने आसपास की परिस्थितियों मे किए गए छोटे बदलाव बड़ी क्रांति को उत्पन्न करते है |" 

 

            सुधा जी ने अपने एक  इंटरव्यू में कहा कि वह शुद्ध शाकाहारी हैं और आम तौर पर अपना भोजन साथ रखती हैं क्योंकि उन्हें चिंता है कि शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के भोजन के लिए एक ही चम्मच का उपयोग किया जाता है और यह मेरे दिमाग पर बहुत  बोझ डालता है। उन्होंने आगे कहा कि जब हम बाहर जाते हैं, तो मैं केवल शाकाहारी रेस्तरां खोजती हूं या मैं खाने-पीने की चीजों से भरा एक बैग ले जाती हूं। मैं खाने के लिए तैयार सामान ले जाती हूं, जो बस पानी में गर्म करके बन जाए। सुधा जी के इस इंटरव्यू से सोशल मीडिया पर उन्हे ट्रोल किया गया जबकि इस बात को लेकर ट्रोल करने का कोई मतलब नहीं है | बहुत से लोग शुद्ध शाकाहारी होते है और वह ऐसे बर्तन मे खाना पसंद नहीं करते जिसमे मांसाहार परोसे जाने की आशंका हो |

असल मे बात कुछ और ही है , हाल ही मे नारायण मूर्ति ने अपने एक इंटरव्यू मे बताया की जब वह प्लेन से यात्रा कर रहे थे और वहाँ करीना कपूर भी थी उनके प्रशंसक उनको हेलो कह रहे थे परन्तु करीना कपूर ने अपने प्रशंसको को अनदेखा कर दिया यह बात मुझे ठीक नही लगी | व्यक्ति को विनम्र होना चाहिए | नारायण मूर्ति  की  इस बात का बदला, सुधा मूर्ति को ट्रोल करके लिया गया | साफ़ ह्रदय की सुधा जी अपनी बात बिना लाग –लपेट के कहती है| संस्कारी ,शिक्षित व उन्नतशील समाज में सुधा मूर्ति का प्रेरक व्यक्तित्व अनुकरणीय है |

 

 © संगीता राजपूत श्यामा



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